नाम- छल्ला श्री निवासुलु शेट्टी, उम्र-12 साल, गांव-पोटलापदू, पेशा-किराने की दुकान के लिए कर्ज इकट्ठा करना। नाम – सीएस शेट्टी- उम्र-55साल पेशा- एसबीआई में सीनियर एमडी। तीन लाइन का यह रिज्यूमे ही अपने आप में बहुत कुछ कहता है। सी एस शेट्टी अब देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के अगले चेयरमैन की रेस में हैं। 40 लाख करोड़ रुपए के असेट्स वाले एसबीआई में इस समय वे सीनियर एमडी हैं।
पिता की किराने की दुकान का बकाया कर्ज इकट्ठा करते थे
उनकी कहानी कुछ ऐसे शुरू होती है। 12 साल की उम्र से ही छल्ला श्री निवासुलु शेट्टी (सीएस शेट्टी) ने अपने स्कूल की छुट्टियों में दक्षिण भारत के छोटे से गांव पोटलापदू में अपने पिता की किराने की दुकान के बकाए कर्ज को इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। खेती के मौसम में शेट्टी गांव के करीब 150 घरों में घूम-घूम कर किसानों से बकाया पैसों की वसूली करते थे। ऐसा करने से पहले वह बकायेदारों की एक लिस्ट अपने साथ रखते थे और भाई के साथ वसूलने के लिए निकल पड़ते थे।
शेट्टी ने याद करते हुए बताया, "मेरा भाई गांव में सॉफ्ट और अधिक लोकप्रिय था। इसलिए उसके कलेक्शन मेरी तुलना में कम होते थे।
अब 42 साल बाद भी उसी पेशे में हैं, लेकिन तरीका बदल गया है
अब 42 साल बाद? शेट्टी का कर्ज कलेक्शन का काम अब भी जारी है। हालांकि अब यह कर्ज का काम बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है। वह भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के तीन प्रबंध निदेशकों (एमडी)में से एक हैं। वे देश के सबसे बड़े बैंक में टॉप पोस्ट से एक पायदान नीचे हैं। उनकी जिम्मेदारी बैंक के 19.6 अरब डॉलर के बैड लोन की रिकवरी का नेतृत्व करना है।
शेट्टी के लिए अब परिस्थितियां काफी अलग हैं
यह समय चुनौती भरा है। शेट्टी के लिए परिस्थितियाँ काफी अलग हैं। क्योंकि उनके स्कूल के दिनों के बाद शायद पहली बार अर्थव्यवस्था इतने खराब मोड़ पर है। भारत के बैड लोन का अनुपात, जो पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है, कोरोनावायरस लॉकडाउन बंद व्यवसायों के बाद से और ज्यादा बढ़ जाने की उम्मीद है। क्योंकि लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।
शेट्टी ने कहा कि उन्होंने अपने पिता के लिए कर्ज इकट्ठा करने से दो अहम सबक सीखे
पहला- टाइम वैल्यू: कितनी जल्दी आप पैसे की वसूली कर सकते हैं, यह महत्वपूर्ण है। जनवरी में एमडी के पद पर पहुंचने के बाद उनका पहला बयान यही था। दूसरा- फॉलो अप: मैं बकाया वसूली में इसके महत्व पर ज्यादा जोर नहीं दे सकता। एसबीआई में 32 साल बिताने वाले शेट्टी स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट की देखरेख करते हैं। इसमें खराब लोन रिकवरी की जिम्मेदारी के साथ-साथ बैंक रिटेल और डिजिटल बैंकिंग की ओर बढ़ रहा है। भारत के बैंकिंग सिस्टम में 1.37 ट्रिलियन डॉलर के बकाया लोन का पांचवां हिस्सा एसबीआई के पास है।
डिफॉल्टरों के साथ फॉलोअप करना महत्वपूर्ण है
शेट्टी ने अपने पहले सिद्धांत के बारे में कहा, हम लंबे मुकदमों (litigations) को लेकर एसबीआई में एक बार सेटलमेंट को तरजीह देते हैं। इस तरह हम समय में नकदी प्राप्त कर लेते हैं। अपने दूसरे लेसन पर उन्होंने कहा कि डिफॉल्टरों के साथ फॉलोअप करना विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के खातों के मामले में ज्यादा महत्वपूर्ण है। कोविड-19 लॉकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था को चार दशकों में पहली बार काफी सिकुड़ जाने की उम्मीद है।
बैड लोन में होगी 7 प्रतिशत की वृद्धि
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, बैंक लोन अगले साल 31 मार्च तक बिल्कुल नहीं बढ़ सकते हैं। मैकिंजी एंड कंपनी का अनुमान है कि देश का बैड लोन अनुपात, वर्तमान में 9.3 प्रतिशत पर है जो आगे 7 प्रतिशत और बढ़ने वाला है। बैंकर अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं कि 6 महीने बाद उनके लोन बुक का क्या होगा। क्योंकि 6 महीने तक लोन लेने वालों को मोराटोरियम दिया गया है। अब तक एसबीआई के करीब 21 फीसदी रिटेल ग्राहक और 10 फीसदी कॉर्पोरेट कर्जदारों ने मोराटोरियम का विकल्प चुना है।
शेट्टी ने कहा कि रिकवरी आउटलुक कॉर्पोरेट बुक की तुलना में रिटेल लोन के लिए बेहतर है। वसूली के लिए उन्होंने अपनी टीम बना ली है।
मोराटोरियम के बारे में एसबीआई के कर्मचारी करते हैं शिक्षित
कुछ भारतीय बैंकों की मानें तो नौकरी को आउटसोर्स करने के बजाय शेट्टी ने एसबीआई के कर्मचारियों से कहा कि वे 1 लाख से अधिक खुदरा ग्राहकों को फोन कर उन्हें मोराटोरियम के शर्तों के बारे में शिक्षित करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह छूट नहीं है। इससे उनकी पुनर्भुगतान (repayment) क्षमता का ऑकलन भी हो जाएगा। शेट्टी ने इन कॉल्स से मिली प्रतिक्रिया के बारे में कहा कि ज्यादातर रिटेल कस्टमर्स ने मोराटोरियम का विकल्प चुना। क्योंकि उन्होंने अनिश्चितता के कारण कैश अपने पास रखने को तरजीह दी। और इसलिए नहीं कि उनके पास चुकाने की क्षमता या इरादा नहीं था।
सैलरी वाले ग्राहकों को लोन देने का फैसला अच्छा है
शेट्टी के अनुसार, यह बैंक के लोन का एक बड़ा हिस्सा 98.5 अरब डॉलर या अपनी टोटल बुक के एक तिहाई से अधिक है और अच्छा ही होगा। उन्होंने कहा, सैलरी ग्राहकों को लोन देने का फैसला सही निकल रहा है। अपने बैंकिंग करियर के दौरान भारत में और न्यूयॉर्क में काम करने वाले शेट्टी ने कहा, कंपनियों से कर्ज वसूलने पर हम क्या दृष्टिकोण अपनाएंगे, यह बताना बहुत मुश्किल है। यह कंपनी की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
लोन अंडरराइटिंग प्रक्रिया को किया मजबूत
शेट्टी के अनुसार, एसबीआई ने चेयरमैन रजनीश कुमार की अगुवाई में पिछले दो वर्षों में लोन अंडरराइटिंग और निगरानी प्रक्रियाओं को कड़ा किया। उन्होंने कहा, बैंक शेयर गिरवी (pledges) और ऋण पत्र (letters of credit) का भुगतान करने में देरी, खातों में किसी भी तनाव को देखने सहित 98 मापदंडों को बारीकी से ट्रैक करता है। एसबीआई ने इस अवधि में अपनी कर्ज वसूली की दर को सुधार कर लगभग 14 प्रतिशत तक दोगुना कर दिया। इसमें नए दिवालियापन कानून (bankruptcy law) का बड़ा योगदान है।
1,800 लोगों की रिकवरी टीम का प्रबंधन करते हैं शेट्टी
1800 लोगों की स्ट्रेस्ड असेट्स रिकवरी टीम को मैनेज करने वाले शेट्टी ने कहा, फिर भी, इस वित्तीय वर्ष के रूप में कंपनियों की परफॉर्मेंस वसूली के मामले में कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि बैंक पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) फ्रेश क्रेडिट लाइनों और वन टाइम सेटलमेंट ऑफर के साथ आएगा। उन्होंने कहा कि ये कठिन परिस्थितियां हैं और हमारे ग्राहकों का हाथ थामने की जरूरत है। देश के बैंकों के शेयरों की कीमतों में 35 प्रतिशत तक की गिरावट इस साल दिखी है। लेकिन एसबीआई के शेयरों में 46 प्रतिशत की गिरावट हुई है।
पिता जी को भरोसा था बेटा एक बैंक टेलर है
उन्होंने कहा, एक बार जब आप समस्या की पहचान करते हैं, तो आप उधारकर्ता को इसे हल करने में मदद कर सकते हैं, और सुधार की योजनाएं लागू की जा सकती हैं। हम प्रमोटर के साथ एक साथ बैठते हैं और एक हल निकालते हैं। शेट्टी के जिस पिता ने 12 साल के लड़के और उसके भाई को गांव में कर्ज वसूलने के लिए जिम्मेदारी दी थी, अब उनका निधन हो गया है। शेट्टी के अनुसार, उनके पिताजी को भरोसा था कि उनका बेटा एक बैंक टेलर है और आगे भी अच्छा काम करेगा।
बचपन की यादों को सुनाते हुए शेट्टी ने कहा कि जब भी गांव के खरीदार किसान सुबह-सुबह घर से बाहर निकलते थे, तभी हम दोनों भाई पहुंच जाते थे। उनके सामने खड़े हो जाते और वह लोग कहते थे कि भाई इससे पीछा छुड़ाना है तो कर्ज लौटा दो। आज भी वही काम है। बस तरीका बदल गया है।
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