भारतीय रेलवे ने कहा है कि 14 अप्रैल या उससे पहले के बुक किए गए यात्री ट्रेनों के सभी टिकट कैंसल किए जाएंगे। रेलव के इस फैसले से साफ हो गया है कि 15 अगस्त तक कोई भी रेगुलर पैसेंजर ट्रेन नहीं चलेंगी। यानी अगर किसी यात्री ने 14 अप्रैल 2020 या उससे 120 दिन पहले ट्रेन का टिकट बुक किया है और उसकी ट्रेन रद्द कर दी गई हो, तो उसे टिकट का पूरा पैसा वापस मिलेगा। इससे पहले 14 मई को भी रेलवे ने 30 जून तक के टिकट कैंसिल कर दिए थे।
यात्रियों को अपने टिकट रद्द न करने की सलाह
बता दें कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने यात्रियों को अपने टिकट रद्द न करने की सलाह दी है। आईआरसीटीसी के अनुसार, भारतीय रेलवे द्वारा सिस्टम में ट्रेन को रद्द करने के बाद ऑटोमेटिक फुल रिफंड शुरू किया जाएगा।
ट्रेनों के शुरू होने मेंलगेगा वक्त
रेलवे मंत्रालय ने सभी जोन को एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर से संकेत मिला है कि अगस्त से पहले ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं होगा। कोविड-19 के चलते लगभग तीन महीने से ट्रेनों के संचालन बंद है। फिलहाल स्थिति सामान्य होने की संभावना नहीं है।
कई रूट्स के लिए स्पेशल ट्रेनें
वहीं, इस समय भारतीय रेलवे 230 आईआरसीटीसी स्पेशल ट्रेनों को स्पेसीफाइड रूट्स पर चलाना जारी रखेगा। कोविड-19 के चलते लागू देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान सभी नियमित ट्रेन सेवाओं को रद्द कर दिया गया है। बाद में लॉकडाउन में छूट मिलने पर आईआरसीटीसी कुछ रूट्स के लिए स्पेशल ट्रेनें चला रही है। शुरुआत में IRCTC की विशेष ट्रेनों में 30 राजधानी- स्टाइल की एसी ट्रेनें शामिल थीं। बाद में 1 जून के बाद से नॉन-एसी स्लीपर ट्रेन सेवाओं के साथ-साथ 200 अन्य विशेष ट्रेनों को चलाया जा रहा है।
सोशल डिस्टेंसिंग का किया जा रहा है पालन
वर्तमान में चलाई जा रही सभी विशेष ट्रेनों में सीमित वेटिंग लिस्ट वाले टिकटों के साथ पूरी तरह से आरक्षित सेवाएं उपलब्ध हैं। इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को सामाजिक सुरक्षा (सोशल डिस्टेंसिंग) और थर्मल स्क्रीनिंग के संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा तय किए गए प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
5,231 नॉन एसी कोचेस आइसोलेशन कोच में तब्दील
रेल मंत्रालय द्वारा जारी ट्वीट के मुताबिक, भारतीय रेल ने अबतक करीब 5,231 नॉन एसी कोचेस को आइसोलेशन कोच में बदला है। इससे कोरोना संक्रमित मरीजों को उपचार के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। इन कोचेस में तापमान कम रखने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा ना हो।
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