विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक बार फिर भारतीय इक्विटी बाजार में वापसी की है। मई-जून की अवधि के दौरान इन निवेशकों ने बाजार में लगभग 35,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। यह निवेश टेलीकॉम, ऑटो, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और मीडिया सेक्टर में किया गया है। हालांकि यह सेक्टर बुरी तरह प्रभावित रहे हैं।
बैंकिंग, रोड्स, हाइवे और शिपिंग में कम किया एक्सपोजर
एनएसडीएल के आंकड़ों से पता चला है कि एफपीआई ने मई में बैंकिंग, रोड्स एवं हाईवे और शिपिंग जैसे सेक्टर्स में अपना एक्सपोजर कम कर दिया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का 31 मई के अंत में 89 हजार 120 करोड़ रुपए के टेलीकॉम स्टॉक्स थे। अप्रैल में इन स्टॉक का वैल्यू 75 हजार 452 करोड़ रुपए था। इसकी तुलना में मई में यह 18.11 प्रतिशत ज्यादा रहा है। बीएसई सेंसेक्स अप्रैल में 3.8 फीसदी गिर कर बंद हुआ था।
कंस्ट्रक्शन मटेरियल सेक्टर में भी बढ़ाया एक्सपोजर
कंस्ट्रक्शन मटेरियल सेक्टर में इन निवेशकों का एक्सपोजर मई के अंत तक 45 हजार 192 करोड़ रुपए था। अप्रैल में 41 हजार 484 करोड़ रुपए की तुलना में यह 9 प्रतिशत ज्यादा है। से 9 प्रतिशत बढ़कर 45,192 करोड़ रुपये हो गया। ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स में एफपीआई के पास 31 मई तक एक लाख 14 हजार 592 करोड़ रुपए के शेयर थे। अप्रैल में यह एक लाख 7 हजार 705 करोड़ रुपए के शेयर थे। यानी मई में इसमें 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई की वापसी पॉजिटिव है
भारतीय स्टॉक मार्केट में तेज गिरावट के बाद इसका वैल्यूएशन अब लॉन्ग टर्म एवरेज से थोड़ा ऊपर है। निर्मल बंग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, भारतीय शेयरों में एफपीआई अब फिर से तेजी का रुझान देखकर निवेश कर रहे हैं। इन विदेशी निवेशकों ने मई में 14,569 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। इस महीने अब तक 19,970 करोड़ रुपए का और निवेश किया है। आंकड़ों से पता चला है कि खाद्य, पेय पदार्थ, तंबाकू, परिवहन, होटल, रेस्तरां, पर्यटन, फार्मा और बायो टेक्नोलॉजी, बीमा और एयरलाइन जैसे कुछ अन्य सेक्टर्स हैं जिनमें मई में एफपीआई के असेट्स अंडर कस्टडी (AUC) में एक अंक में वृद्धि दिखी है।
पर्सनल केयर प्रोडक्ट में भी निवेश कर रहे हैं एफपीआई
एफपीआई के एयूसी में वृद्धि ताजा खरीद, या मार्केट टू मार्केट से लाभ या दोनों का परिणाम हो सकता है। आंकड़ों से पता चला है कि एफपीआई ने घरेलू और पर्सनल केयर प्रोडक्ट के सेगमेंट में दांव लगाना जारी रखा है। मई में 1 एक लाख 25 हजार 437 करोड़ रुपए के निवेश की तुलना में अप्रैल 13.5 प्रतिशत कम यानी एक लाख 10 हजार 506 करोड़ रुपए का निवेश किया था। एफपीआई ने जो भी पैसा मार्च और अप्रैल में बाजार से निकाला था उसमें से आधे से अधिक पैसा का वो निवेश चुके हैं।
निर्मल बंग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, निकट अवधि में हमारा मानना है कि लिक्विडिटी सुरक्षित असेट्स में बनी रहेगी। इससे रिटर्न से पहले वैल्यूएशन कुछ ज्यादा हो सकता है।
बैंकिंग सेक्टर में निवेश कम किया
बैंकिंग सेक्टर में एफपीआई की परिसंपत्तियों के मूल्य में गिरावट देखने को मिली है। 31 मई तक 4 लाख 15 हजार 61 करोड़ रुपए का कुल एक्सपोजर रहा है। अप्रैल में यह 4 लाख 65 हजार 367 करोड़ रुपए था। टेक्सटाइल, यूटिलिटीज, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल एस्टेट और केमिकल्स कुछ अन्य सेक्टर्स में भी मई में एफपीआई ने अपना एक्सपोजर कम किया था।
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