लद्दाख की गलवान घाटी में एलएसी पर हिंसक झड़प में 20 सैनिकों की मौत के बाद भारत चीन पर आर्थिक समेत सभी मोर्चों पर शिकंजा कस कर रहा है। इस बीच खबर आ रही है कि भारत इक्विटी मार्केट में चीनी कंपनियों के निवेश पर रोक लगा सकता है।
एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, चीनी कंपनियों के निवेश पर रोक लगाने के संबंध में बाजार नियामक सेबी और वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के बीच विचार चल रहा है। कुछ चीनी कंपनियों के निवेश पर जल्द ही रोक लग सकती है।
चीन से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य
कोरोना संक्रमण के दौरान देश में विदेशी निवेश के बढ़ने की खबरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने अप्रैल में बड़ा कदम उठाया था। केंद्र सरकार ने चीन समेत सभी पड़ोसी देशों से आने वाले विदेशी निवेश के लिए सरकार की मंजूरी को अनिवार्य कर दिया था। यह फैसला उन देशों पर लागू हुआ था, जिनके साथ भारत जमीनी सीमाएं साझा करता है। इन देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं।
चीन के 16 वित्तीय संस्थान एफपीआई के रूप में रजिस्टर्ड
चीन के 16 संस्थानों ने हाल ही मेंभारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के रूप में स्थाई रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें प्रमुख रूप से एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) और पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) का समावेश है। एआईआईबी एक मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक है, जिसमें भारत एक सदस्य है। वहीं पीबीओसी चीन का केंद्रीय बैंक है।
111 कॉर्पोरेट्स हांगकांग से हैं
इसके अलावा, भारत में एफपीआई के रूप में रजिस्टर्ड 111 संस्थाएं हांगकांग से हैं। इसमें बेस्ट इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन से जुड़े रजिस्टर्ड एफपीआई में ब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट, कोलंबिया मैनेजमेंट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, फिशर एसेट मैनेजमेंट, इनवेस्को एसेट मैनेजमेंट, मेपल-ब्राउन एबॉट, टीटी इंटरनेशनल और वेस्टवुड मैनेजमेंट कॉर्प द्वारा प्रबंधित लोग शामिल हैं। हांगकांग की संस्थाओं को चीन से जुड़ा हुआ माना जाता है।
स्टार्टअप में अब तक 263 मिलियन डॉलर का निवेश
चीन भारतीय कंपनियों में लगातार निवेश कर रहा है। इस साल अब तक चीन की कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स में 263 मिलियन डॉलर का निवेश कर चुकी हैं। भारतीय स्टार्टअप्स में चीनी कंपनियों का निवेश 2019 में 1230 मिलियन डॉलर और 2018 में 1340 मिलियन डॉलर था। चीन की कंपनियों ने 2014 में भारत स्टार्टअप्स में 51 मिलियन डॉलर निवेश किया था। यह 2019 में बढ़कर 1230 मिलियन डॉलर हो गया है। यानी 2014 से 2019 के बीच चीन ने भारतीय स्टार्टअप्स में कुल 5.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।
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