भारत ने चीन, दक्षिण कोरिया और वियतनाम से इम्पोर्ट होने वाले कुछ स्टील प्रॉडक्ट्स पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। एक जांच से पता चला कि इन प्रॉडक्ट्स के वजह से घरेलू प्रॉडक्ट्स को नुकसान हो रहा है।
राजस्व विभाग ने एक आदेश में कहा कि एल्युमीनियम और जस्ता की मिश्र धातु के साथ लेपित स्टील के फ्लैट रोल प्रॉडक्ट को इन देशों से उनके सामान्य मूल्य से नीचे निर्यात किया गया। जिसकी वजह से घरेलू प्रॉडक्ट्स को नुकसान हुआ। एक देश से दूसरे देश में ड्यूटी दर अलग-अलग होती है। चीन से निर्यात स्टील पर लागू उच्चतम दर 128.9 डॉलर प्रति टन है।
आदेश में कहा गया है कि अक्टूबर 2019 में प्रॉडक्ट्स पर लगाई गई प्रोविजनल एंटी-डंपिंग ड्यूटी इस साल अप्रैल में खत्म हो गई थी। मंगलवार से शुरू हुई एंटी-डंपिंग ड्यूटी पिछले साल अक्टूबर से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए लागू होगी।
चीन से निर्यात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी को उस वक्त लगाया गया जब भारत-चीन की सीमा पर विवाद चल रहा है। वहीं, चीनी सैनिकों के साथ हुए संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो चुके हैं।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड ने की जांच
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर महेश जयसिंग ने कहा कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला कि इन देशों के सामानों के आयात से मुनाफे, नकदी प्रवाह और निवेश पर वापसी के मामले में घरेलू उद्योग के प्रदर्शन में गिरावट आई है। कम लागत में आयात प्रॉडक्ट्स लोकल प्रोडक्ट्स को बाजार से बाहर कर देते हैं।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या है?
यदि कोई कंपनी अपने बाजार में एक निश्चित कीमत पर बेची गई वस्तु को उससे अधिक मूल्य पर निर्यात करती है, तो कहा जाता है कि प्रॉडक्ट में डंपिंग की गई है। इसी कारण ऐसे प्रोडक्ट्स पर डंपिंग का मुकाबला करने और घरेलू बाजार को बचाने के लिए, आयात करने वाले देशों द्वारा एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है।
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