पिछले करीबन तीन महीनों से चल रहे लॉकडाउन के समय का उपयोग इक्विटी के निवेश में भी हो रहा है। खबर है कि दूसरे और तीसरे दर्जे के जो छोटे शहर हैं, वहां इस लॉकडाउन में नए निवेशक बने हैं। आश्चर्य है कि ये लोग पहली बार निवेश कर रहे हैं और इसके लिए इक्विटी में जा रहे हैं। जबकि इक्विटी एक जोखिम वाला निवेश है। यही नहीं, महिलाएं भी अब इक्विटी के निवेश की दुनिया में अपने हाथ आजमा रही हैं।

मार्च से मई के बीच डीमैट खातों में हुई वृद्धि

एक अग्रणी ब्रोकरेज हाउस के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल मार्च में निवेशकों की संख्या में अचानक काफी वृद्धि देखी गई है। एक अन्य ब्रोकरेज हाउस ने बताया कि मार्च में उसके यहां 60 हजार नए डीमैट खाते खुले हैं। यह रुझान आगे भी जारी रहा और अप्रैल-जून तिमाही में कुल 2 लाख नए डीमैट खाते खोले गए। एंजल ब्रोकिंग ने बताया कि उसके यहां लॉकडाउन में कुल एक लाख नए डीमैट खाते खुले हैं। यह खाते एक मार्च से मई तक खोले गए हैँ।

लॉकडाउन में नए खातों की बढ़ी संख्या

जीरोधा डॉटकॉम ने बताया कि उसके पास कुल 20 लाख डीमैट अकाउंट हैं। इसमें से पांच लाख डीमैट अकाउंट लॉकडाउन के समय में खोले गए हैं। इससे पता चल रहा है कि निवेशक खाली समय का उपयोग निवेश के लिए कर रहे हैं। इस ब्रोकरेज हाउस ने बताया कि इसके ग्राहकों की संख्या में 27 प्रतिशत की वृद्धि दिखी है। जबकि मासिक आधार पर यह वृद्धि 3 गुना रही है। इसके मुताबिक पिछले साल इस ब्रोकेरज हाउस ने जितना खाता खोला था, उससे ज्यादा खाता इस साल के पहले पांच महीनों में ही खोल दिया है।

इस ब्रोकरेज हाउस के पास ज्यादातर डीमैट खाते बड़े शहरों में हैं, लेकिन इसने दूसरे नंबर के शहर जैसे नागपुर, जयपुर, नासिक आदि में भी बड़े पैमाने पर डीमैट अकाउंट खोले हैं।

आधे निवेशकों की उम्र 25 से 35 साल की है

जिरोधा अकेले ऐसा ब्रोकरेज नहीं है। एंजल ब्रोकिंग ने मार्च 2020 में एक लाख नए खाते खोले हैं। इसमें से 80 प्रतिशत डीमैट खाते दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में हैं। इसके 65 प्रतिशत नए खाते ऐसे हैं जो पहली बार निवेशक हैं। कंपनी लॉकडाउन में वेबिनार के जरिए निवेशकों को जानकारी दे रही है। इस ब्रोकिंग हाउस के मुताबिक नए डीमैट खातों में से करीबन आधे निवेशक 25 से 35 साल की उम्र के हैं। जबकि एक चौथाई निवेशक 18 से 25 साल की उम्र के हैं। बाकी निवेशकों की संख्या 35 साल से ऊपर की है।

70 प्रतिशत डीमैट खाते दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों से

इसी तरह एक छोटे ब्रोकरेज हाउस ने बताया कि उसके 70 प्रतिशत डीमैट खाते दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों के हैं। आंकड़ों से पता चला है कि नए डीमैट खातों में से करीबन 10 प्रतिशत डीमैट खाते महिलाओं के हैं। यह हालांकि कोविड से पहले के ही स्तर पर है। एंजल ब्रोकिंग ने लॉकडाउन के दौरान महिलाओं का 30 हजार नया डीमैट खाता खोला है। कंपनी के कुल खातों का यह करीबन 10.5 प्रतिशत हिस्सा है।

स्टॉक निवेश भी फाइनेंशियल एंपावरमेंट का जरिया है

ब्रोकिंग हाउस का मानना है कि अब सभी वर्कप्लेस पर महिलाएं काम कर रही हैं, इसलिए निवेश की दुनिया में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है। स्टॉक इन्वेस्टमेंट भी अच्छा फाइनेंशियल एंपावरमेंट दे रहा है। इसलिए इसमें महिलाओं का योगदान दिख रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस के मुताबिक नए डीमैट खाते सभी स्थानों से आ रहे हैं। इस ब्रोकरेज हाउस की 500 शहरों में मौजूदगी है। ज्यातार डीमैट खाते मेट्रो और दूसरे स्तर के शहरों से हैं। इसमें से 20 प्रतिशत डीमैट खाते महिलाओं के हैं। ब्रोकरेज हाउसों के मुताबिक मार्च से मई के दौरान छोटे शहरों से नए डीमैट खाते खुल रहे हैं।

मार्च से अब तक निफ्टी 30 प्रतिशत बढ़ा

बता दें कि निफ्टी-50 ने मार्च में 7,500 का बॉटम बनाया था। तब से अब तक यह 30 प्रतिशत बढ़कर 10,000 के करीब कारोबार कर रहा है। इस तरह से अगर किसी ने मार्च में अच्छे स्टॉक्स में निवेश किया होगा तो उसे 25-30 प्रतिशत का रिटर्न मिला है। लॉकडाउन की वजह से भले ही अर्थव्यवस्था में निगेटिव माहौल बना हो, बावजूद इसके इक्विटीज, म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि लोगों के पास खर्च कम होने से पैसे बचे हैं और वे इसका उपयोग निवेश के लिए कर रहे हैं।

ब्याज दरें घटने से निवेशक इक्विटीज और म्यूचुअल फंड की ओर

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों के चालू और बचत खाते पर कम ब्याज दरों की वजह से भी निवेशक इक्विटीज और म्यूचुअल फंड में आ रहे हैं। फिलिप कैपिटल का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बचत को लेकर अब एक बड़ा स्ट्रक्चरल (ढांचागत) बदलाव दिख रहा है। चूंकि कोरोना की वजह से नए एनपीए बैंकों में बढ़ेंगे, इसलिए निवेशक म्यूचुअल फंड की ओर जा रहे हैं।



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लॉकडाउन के बाद अनलॉक एक में शेयर बाजार ने अच्छा रिटर्न दिया है

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