ओयो होटल्स एंड होम्स, जोमैटो और ग्रोफर्स सहित भारत के टॉप स्टार्टअप्स ने अपने कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन प्लान (इसॉप्स) पूल का विस्तार किया है। यह इसलिए क्योंकि इस तरह के अधिक स्टॉक छुट्टी पर भेजे गए कर्मचारियों या उन लोगों को सौंप दिया गया है जिनका वेतन कोविड-19 के दौरान काटा गया है।
ग्रोफर्स ने इसॉप्स पूल को 11 प्रतिशत, ओयो ने 5.7 प्रतिशत किया
ऑनलाइन ग्रॉसरी कंपनी ग्रोफर्स ने अपने इसॉप्सपूल को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 11 प्रतिशत से अधिक कर दिया है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेक्सन डेटा के मुताबिक, हॉस्पिटैलिटी चेन ओयो ने सॉफ्टबैंक समर्थित कंपनी के इसॉप्सको भी बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत कर दिया है, जो मार्च 2019 में 4.9 प्रतिशत था। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत के शीर्ष स्टार्टअप्स को कोरोना से कड़ी टक्कर मिली है। साथ ही कईयों की या तो सैलरी काट ली गई है या फिर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है।
कई को लंबी छुट्टियों पर भेज दिया गया है। यह इसलिए क्योंकि कंपनियों को बैलेंस शीट को ठीक-ठाक करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
ग्रॉफर्स ने इसॉप्स को बढ़ाकर 11.4 प्रतिशत किया
ग्रॉफर्स के सीईओ अलबिंदर ढींढसा ने कहा कि जब कोविड-19 महामारी आई तो हमने कर्मचारियों से कहा कि वे स्वेच्छा से वेतन में कटौती स्वीकार कर लें। उन्हें अतिरिक्त Esops के साथ मुआवजा भी ऑफर किया और अप्रैल में 150 कर्मचारियों ने इस पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर 600 लोग सामने आए आए और हमने Esops पूल बढ़ाकर 11.4 प्रतिशत कर दिया है।
अमेरिका में यह एक अलग बाजार है
अर्नेस्ट एंड यंग में पार्टनर अंकुर पहवा ने कहा कि अमेरिका में यह एक बहुत अलग बाजार है। क्योंकि वे Esops कांसेप्ट को बहुत बेहतर समझते हैं। इसने दोनों, स्टार्टअप और उनके कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छी तरह से काम किया है। इसे वहां एक विशाल असेट निर्माण के रूप में देखा जाता है और कर्मचारियों को खुद उद्यमियों में बदलने के लिए एक मौका प्रदान करता है।
ओयो ने कर्मचारियों को 130 करोड़ रुपए के मूल्य का इसॉप्स दिया है
ओयो और जोमैटो ने भी प्रभावित कर्मचारियों को अलग से स्टॉक जारी किया है। ओयो का मूल्य अपनी पिछली फंडिंग के दौर के बंद होने के बाद 10 अरब डॉलर है। इसने भी ऐसे कर्मचारियों को 130 करोड़ रुपए मूल्य के Esops दिए हैं। अब जबकि कंपनियाँ कैश को संरक्षण दे रही हैं, वे कर्मचारियों को बाहर निकलने के समय अपने वेतन का हिस्सा छोड़ने के अवसर की पेशकश कर रही हैं।
वेंचर कैपिटल फर्म, स्टेलरिस पार्टनर्स में पार्टनर रितेश बंगलानी ने बताया कि इसमें रिस्क है, लेकिन अगर कंपनी को अच्छा एग्जिट मिलता है तो वे ऐसा फायदा उठाने के लिए खड़े हो जाते हैं जो उनकी सैलरी से कई गुना अच्छा है।
कर्मचारियों को नुकसान होने से बचाना है उद्देश्य
स्टार्टअप्स आम तौर पर Esops को अपने कुल स्टॉक होल्डिंग का अनुमानित 5-6 प्रतिशत आवंटित करते हैं। कोविड-19 की वजह से इसमें वृद्धि हो गई है। विश्लेषकों के मुताबिक यदि इन अतिरिक्त Esops को अच्छी तरह से स्ट्रक्चर किया जाता है तो आगे चलकर यह मुनाफे का सौदा होंगे। कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि स्ट्राइक प्राइस आज के मूल्यांकन पर नहीं आंकी गई है। स्ट्राइक प्राइस अब तेजी से फोकस में आ गया है।
इसॉप्स को और अधिक आकर्षक बनाने की जरूरत
ढींढसा के मुताबिक ग्रोफर्स में इसॉप्सके लिए स्ट्राइक प्राइस जीरो डॉलर रखा जा रहा है, ताकि कर्मचारियों को नुकसान न हो। पहवा ने कहा कि स्पष्ट नियमों की जरूरत है कि कर्मचारियों के लिए कैसे Esops को और अधिक आकर्षक बनाया जाये। ज्यादातर कर्मचारियों के लिए अगर स्ट्राइक प्राइस मार्केट वैल्यू के करीब निर्धारित होगा तो वे इसे बर्दाश्त करने में सक्षम नहीं होगें।
जिरोधा ने बायबैक का किया एलान
उधर डिस्काउंट ब्रोकरेज जिरोधा इस साल Esops को वापस खरीदने के लिए 60-65 करोड़ रुपए खर्च करेगा। कंपनी ने कहा कि क्योंकि जीरोधा इस साल के अंत में अपनी 10वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। इसलिए इस बायबैक का उद्देश्य सीनियर मैनेजमेंट और कर्मचारियों को लिक्विडिटी विकल्पों को उपलब्ध कराना है। जिरोधा ने पिछले साल करीब 200 करोड़ रुपए का ईएसओपी पूल बनाया था और यह कर्मचारियों को अपने 33 फीसदी शेयरों में से 5 से 50 फीसदी को बेचने की इजाजत देगा।
बायबैक 700 रुपए प्रति शेयर पर हो सकता है
बायबैक अपनी बुक वैल्यू से चार गुना या 700 रुपए प्रति शेयर पर किया जा रहा है और इससे करीब 700 कर्मचारियों को फायदा होने की उम्मीद है। कामथ ने कहा कि हमने सोचा कि यह उन लोगों को कुछ लिक्विडिटी देने का एक अच्छा समय है जो कुछ समय के लिए हमारे साथ और हमारे आसपास रहे हैं।
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