सरकार के सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रस्तावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार ने सलाहकार फर्म, निवेश बैंकर्स और वित्तीय संस्थानों से टेंडरआमंत्रित की है।
कोविड से कई कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री टली है
बता दें कि एलआईसी का आईपीओ देश में अब तक सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इसके लिए सरकार दो प्री-आईपीओ ट्राँजेक्शन सलाहकारों को शामिल करेगी। गौरतलब है कि एअर इंडिया, बीपीसीएल, कॉनकोर सहित कई कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की सरकार की योजना को कोरोना महामारी के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। शुक्रवार को जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोज़ल (आरएफपी) के अनुसार टेंडर की अंतिम तारीख 13 जुलाई रखी गई है।
टेंडर 14 जुलाई को खोला जाएगा
इस टेंडर को 14 जुलाई को खोला जाएगा। सरकार ने आरएफपी में कहा कि एलआइसी के आईपीओ के लिए शुरुआती चरण में DIPAM की सुविधा और सहायता करने के लिए प्रतिष्ठित पेशेवर सलाहकार फर्म, निवेश और मर्चेंट बैंकर्स, वित्तीय संस्थानों को शामिल करने का प्रस्ताव है। सलाहकार आईपीओ के शुरुआती पहलुओं को सुनिश्चित करेगा और आईपीओ के तौर-तरीकों, समय, लेन-देन का आयोजन करने, माइनॉरिटी सेल के लिए कीमत का सुझाव देने के लिए सरकार को सलाह और सहायता करेगा।
टेंडर में भाग लेनेवालों को तीन साल का अनुभव होना चाहिए
सरकार ने सलाहकारों के लिए योग्यता भी जारी कर दी है। इसमें पिछले तीन वर्षों में 5,000 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन या आईपीओ की हैंडलिंग का अनुभव होना चाहिए। टेंडर में भाग लेनेवालों के पास आईपीओ या स्ट्रेटेजिक डिसइनवेस्टमेंट का अनुभव होना चाहिए। बिक्री या विलय और अधिग्रहण की गतिविधियों या निजी इक्विटी निवेश लेनदेन के लिए तीन साल का अनुभव होना चाहिए। दरअसल सरकार एलआईसी को जनवरी-मार्च की तिमाही में आईपीओ लाकर लिस्ट कराने की योजना बना रही है। एलआईसी का आईपीओ इस वित्त वर्ष में सरकार के 2.10 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश लक्ष्य में बड़ा योगदान देगा।
बजट में वित्तमंत्री ने एलआईसी आईपीओ की घोषणा की थी
2020-21 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलआईसी में सरकार की होल्डिंग का एक हिस्सा पब्लिक लिस्टिंग के जरिए बेचने की घोषणा की थी। अभी तक एलआईसी की पूरी मालिक सरकार है। सीतारमण ने कहा था कि स्टॉक एक्सचेंजों पर कंपनियों की लिस्टिंग कंपनी में गवर्नेंस पैदा करता है और फाइनेंशियल मार्केट में इसकी पहुंच बढ़ाता है। इससे इसके वैल्यू में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा था कि यह रिटेल निवेशकों को उनके ही द्वारा बनाई गई कंपनी में भाग लेने का अवसर भी देता है।
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