टेलीकॉम इंडस्ट्री इस समय गहरे वित्तीय संकट से जूझ रही है। इसके बावजूद टेलीकॉम कंपनियों को तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश की जरूरत है। इन समस्याओं से निपटने के लिए कंपनियों को 2021 के अंत तक एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (एआरपीयू) को दोगुना करते हुए 300 रुपए पर ले जाना होगा। यह बात सेल्यूलर ऑपरेर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कही है।
ग्राहकों पर पड़ेगा बोझ
मौजूदा समय में टेलीकॉम कंपनियों का एआरपीयू 150 रुपए के आसपास है। यदि इसमें कोई बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा। मैथ्यूज ने कहा कि एआरपीयू में बढ़ोतरी का सारा बोझ निश्चित तौर पर सब्सक्राइबर्स पर ही पड़ेगा। हालांकि, मैथ्यूज ने उम्मीद जताई कि महामारी के बाद एंटरप्राइजेज मोबिलिटी पर आधारित ज्यादा से ज्यादा एप्लीकेशंस और सॉल्यूशंस अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि हम इस समय 150 रुपए के एआरपीयू पर हैं और इसे साल के अंत तक 200 रुपए पर पहुंचाने की जरूरत है। कंपनियों को अपनी सेवाएं देने के साथ अपने नेटवर्क में नए निवेश के लिए इसे अगले साल के अंत तक 300 रुपए तक पहुंचाना होगा।
1 साल में दोगुना हुआ एआरपीयू
राजन मैथ्यूज ने कहा कि टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण पिछले एक साल में एआरपीयू दोगुना हो गया है। हालांकि, यह 5 साल पहले फोन बिल और रिचार्ज पर खर्च की जाने वाली राशि से अभी भी सस्ता है। सीओएआई के एक सर्वे का हवाला देते हुए मैथ्यूज ने कहा कि 5 साल पहले एक भारतीय की औसत वार्षिक आय 1500 डॉलर होती थी, जिसका 6 से 7वां हिस्सा वह टेलीकॉम सेवाओं पर खर्च करता था। अब वार्षिक औसत आय बढ़कर 2600 डॉलर हो गई है और अब भारतीय फोन बिल या रिचार्ज पर इसका 1 फीसदी से भी कम खर्च करता है। यदि यह खर्च दोगुना भी हो जाता है तो यह पांच साल पहले खर्च की जाने वाली राशि से कम ही होगा।
टैरिफ फ्लोर प्राइस पर जल्दी निर्णय चाहती हैं कंपनियां
मैथ्यूज ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ फ्लोर प्राइस पर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) से जल्द फैसला चाहती हैं। ट्राई का कहना है कि इस संबंध में फैसला मौजूदा हालातों के सामान्य होने के बाद ही लिया जाएगा।
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