भारत और चीन के बढ़ते विवाद के बीच देश में चीनी प्रॉडक्ट बॉयकॉट करने की मुहिम शुरू हो गई है। ऐसे में सरकार ने भी घरेलू व्यवसायों की आगे बढ़ाने के लिए चीन प्रॉडक्ट्स के ऊपर ट्रेड बैरियर लगाने का प्लान बना लिया है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने चीन के लगभग 300 प्रॉडक्ट के ऊपर आयात शुल्क बढ़ाने की योजना बनाई है।

रॉयटर्स द्वारा देखे गए सरकारी दस्तावेज के अनुसार, लोकल प्रॉडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल से इस योजना की समीक्षा की जा रही है। ये हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है।

3 महीने में लागू हो सकता है नया ड्यूटी स्ट्रक्च
सूत्रों के मुताबिक, नया ड्यूटी स्ट्रक्चर अगले तीन महीनों में धीरे-धीरे लागू किए जाने की संभावना है। हालांकि, अभी इस योजना का नाम नहीं बताया गया है। इससे जुड़ी चर्चाओं में भारत का वित्त मंत्रालय और व्यापार मंत्रालय शामल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, सरकार 160-200 प्रॉडक्ट्स पर आयात शुल्क बढ़ाने और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को लागू करने पर विचार कर रही है। अन्य 100 प्रॉडक्ट की लाइसेंसिंग रिक्वारमेंट या स्ट्रिक्ट क्वालिटी चेक की जाएगी।

देश के व्यापार घाटे को कम करने की पहल
योजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सरकार का यह निर्णय गैर-जरूरी निम्न गुणवत्ता वाले प्रॉडक्ट्स के आयात को रोकने के उद्देश्य से 8-10 अरब डॉलर के आयात को लक्षित करेगा, जो भारतीय प्रॉडक्ट्स को कॉम्पिटिशन देते हैं।

वहीं, दूसरे अधिकारी ने कहा कि हम किसी भी देश को टारगेट नहीं कर रहे हैं, लेकिन ये चीन जैसे देशों के साथ व्यापार घाटे को कम करने वाले तरीकों में से एक है।

मार्च 2019 में 88 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ
चीन और भारत के बीच मार्च 2019 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 88 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। चीन के पक्ष में 53.5 बिलियन डॉलर के व्यापार घाटे के साथ, व्यापक भारत किसी भी देश के साथ है।

अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 के बीच के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 46.8 बिलियन डॉलर था। भारत ने पहले ही फरवरी में इलेक्ट्रॉनिक आइटम, खिलौनों और फर्नीचर जैसे सामानों के आयात पर टैक्स बढ़ा दिया है।

इंजीनियरिंग सामान पर बढ़ सकता है टैक्स
इस मामले से जुड़े एक अन्य सोर्स के मुताबिक इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कुछ चिकित्सा उपकरण योजना में आने वाले प्रॉडक्ट्स में से होंगे। वहीं, एक अन्य सरकारी सोर्स के मुताबिक, नॉन-टैरिफ बैरियर्स जैसे कि स्ट्रिक्ट क्वालिटी कंट्रोल सर्टिफिकेशन एयर कंडीशनर जैसे प्रॉडक्ट पर लागू हो सकते हैं।

मोदी सरकार 2014 के बाद से लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम को बढ़ावा दिया, वहीं हाल ही में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान शुरू किया है।

300 प्रॉडक्ट पर मंत्रालय की प्रतिक्रिया मांगी
सरकारी दस्तावेज में दिखाया गया है कि लगभग 300 प्रॉडक्ट की लिस्ट पर मंत्रालयों से प्रतिक्रिया मांगी गई है। हालांकि, इस लिस्ट में कौन से प्रोडक्ट्स शामिल हैं इसका अभी खुलासा नहीं हुआ। दस्तावेज में कहा गया है कि भारत ने 2014 के बाद से कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर से प्रॉडक्ट को कवर करने वाली 3,600 से अधिक टैरिफ लाइनों पर शुल्क बढ़ाया है।

एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि हम अपनी मजबूती और कमजोरियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की नीति पर जोर दे रहे हैं।



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चीन और भारत के बीच मार्च 2019 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 88 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था

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