अगर आप थोड़ा जोखिम लेना चाहते हैं तो आपके निवेश पर बेहतरीन रिटर्न मिल सकता है। राज्य सरकारों के बांड्स पर इस समय 9 से 10 प्रतिशत की दर से रिटर्न मिल रहा है। यह रिटर्न बैंकों की एफडी पर मिल रहे ब्याज की तुलना में 4 से 5 प्रतिशत ज्यादा है।
निवेशक खरीद रहे हैं राज्य सरकारों के बांड्स को
ऐसा देखा जा रहा है कि अमीर निवेशक राज्य सरकार के बांड्स को इस समय खरीद रहे हैं। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) और आंध्र प्रदेश के एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के बांड्स में जोरदार बिक्री हो रही है। जबकि पंजाब इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और पश्चिम बंगाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फाइनेंस के बांड में भी ठीक-ठाक सौदा हो रहा है।
हाल में सरकार ने 7.75 प्रतिशत ब्याज वाले बांड को बंद कर दिया था
जीईपीएल कैपिटल के प्रमुख रुपेश भंसाली ने कहा कि निवेशकों को बैंक डिपॉजिट की तुलना में राज्य सरकारों के बांड्स पर 4 से 5 प्रतिशत ज्यादा ब्याज मिल रहा है। इस बांड्स को रा्ज्य सरकार का समर्थन रहने से निवेशक इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। हाल में सरकार ने 7.75 प्रतिशत वाले अपने बांड्स को बंद कर दिया था। साथ ही परपेच्युअल बांड मार्केट में गिरावट और फ्रैंकलिन टेंम्पल्टन की 6 डेट स्कीमों के बंद होने से निवेशकों की नजर इस तरह की ज्यादा ब्याज वाली स्कीम पर है।
यूपी पावर कॉर्पोरेशन बांड में 9.4 प्रतिशत का ब्याज
इस बांड को डीमैट के रूप में रखते हैं। डेट मार्केट के मीडिएटर द्वारा इसे खरीदा जा सकता है। इसी तरह एए (एसओ) रेटिंग वाले यूपी पावर कॉर्पोरेशन के बांड पर 9.4 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है। यह बांड्स 2023 के आधार पर 99.65 के भाव पर कारोबार कर रहा है। इस बांड में चार चरण में रीपेमेंट होता है। यानी प्रत्येक चरण में 25 प्रतिशत का रीपेमेंट होता है। इस आधार पर 2023 में पैसा मिलेगा।
आंध्र प्रदेश के बांड्स में 10.34 प्रतिशत का ब्याज
ए प्लस रेटिंग वाला बांड 2024 में मैच्योर होगा। आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के बांड में 10.34 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है। मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट के डेप्युटी एमडी आशीष शंकर ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से रीपेमेंट की सुविधा के साथ कम समय के पेपर्स में निवेशकों को कैशफ्लो मिलने से यह आकर्षक साबित हो रहा है। हालांकि सिंगल बांड में म्यूचुअल फंड की तुलना में ज्यादा जोखिम भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि म्यूचुअल फंड स्कीम में शेयरों का बॉस्केट होता है।
कई बार डिफॉल्ट भी हो जाते हैं बांड्स
विश्लेषकों के मुताबिक राज्य सरकारों का इस तरह के बांड्स को समर्थन होता है। कई कंपनियां इसमें राज्य सरकार पर आधारित रहती हैं। राज्य की राजनीति या किसी भी तरह के बदलाव से इस तरह के बांड पर असर दिखता है। इससे निवेशकों को ब्याज चुकाने में इन कंपनियों को दिक्कत हो सकती है। इसलिए निवेशकों को ऊंचा ब्याज लेने के लिए थोड़ा जोखिम भी लेना पड़ सकता है। इस तरह का जोखिम 2000 से 2004 के बीच देखा गया है जब कई पावर कॉर्पोरेशन डिफॉल्ट हो गए थे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
https://ift.tt/2N9lcT5
0 टिप्पणियाँ
We welcomes your opinion.