वर्ष 2019 में एटीएम फीस पर बनी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक कमेटी ने 5 हजार रुपए से ज्यादा की कैश निकासी पर चार्ज लगाने की सिफारिश की थी। आरटीआई के जरिए मिली आरबीआई की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
आईबीए के तत्कालीन चीफ थे आरबीआई कमेटी के मुखिया
आरबीआई की इस कमेटी के मुखिया इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के तत्कालीन चीफ एक्जीक्यूटिव वीजी कन्नन थे। कमेटी ने यह रिपोर्ट 22 अक्टूबर 2019 को आरबीआई को सौंप दी थी। लेकिन यह रिपोर्ट कभी जारी नहीं की गई। इस रिपोर्ट में एटीएम से नकद निकासी में कमी लाने के लिए 5000 रुपए से ज्यादा की निकासी पर चार्ज लगाने की सिफारिश की गई थी।
पीआईओ ने खारिज कर दी थी आरटीआई
लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, आरटीआई कार्यकर्ता श्रीकांत एल की याचिका को आरबीआई के पब्लिक इन्फोर्मेशन ऑफिसर (पीआईओ) ने खारिज कर दिया था। इसके बाद श्रीकांत ने अपीलेट प्राधिकरण में याचिका दाखिल की। अपीलेट प्राधिकरण के आदेश पर आरबीआई ने कमेटी की यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई।
रिपोर्ट की खास बातें
- आरबीआई कमेटी ने नए एटीएम लगाने की संख्यापर चिंता जताई थी। खासतौर पर सेमी अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों में।
- एटीएम चार्ज की गणना में जनसंख्या मैट्रिक का प्रयोग करने की सिफारिश की गई थी।
- 10 लाख से कम आबादी वाली सभी स्थानों पर निशुल्क एटीएम ट्रांजेक्शन की बात कही गई थी।
- 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले स्थानों पर निशुल्क ट्रांजेक्शन की संख्या 3 पर सीमित करने की सिफारिश।
- फ्री ट्रांजेक्शन की हर 6 महीने पर समीक्षा करने की जाए।
- फ्री ट्रांजेक्शन की सीमा समाप्त होने के बाद प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर अधिकतम 24 रुपए+टैक्स लिया जाए।
- 10 लाख या इससे ज्यादा की आबादी वाले स्थानों पर वित्तीय ट्रांजेक्शन के लिए इंटरचेंज फीस को 2 से बढ़ाकर 17 रुपए और गैर वित्तीय ट्रांजेक्शन के लिए इंटरचेंज फीस को 7 रुपए रखा जाए।
- 10 लाख से कम आबादी वाले स्थानों पर वित्तीय और गैर वित्तीय दोनों प्रकार के ट्रांजेक्शन के लिए इंटरचेंज फीस में 3 रुपए की बढ़ोतरी की जाए।
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